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बुजुर्गों का घर में महत्व

नमस्ते, पाठकों स्वागत है आपका मेरी ब्लॉग साइट पर। आज में एक नई कहानी के साथ प्रस्तुत हूं जिसके सारे पात्र काल्पनिक हैं मेरी कहानी का शीर्षक है ‘ बुजुर्गों का घर में महत्व ‘

ब्रजभूषण आज 70 साल के हो गए वे 50 साल के आयु से सहसा अंधे हो गए थे शायद उम्र का तकाजा रहा होगा की वे सहसा अंधे हो गए। ख़ैर क्या कर सकते हैं जैसा भगवान को मंजूर।

आज सुबह उनका बेटा राहुल अपने बेटे जय के साथ उनके पास आता है और जन्मदिन की शुभकामनाएं देता है वे सोचते हैं कि जय तो हर बार उनके पास आता है पर राहुल का आना उन्हें कुछ खटका फिर सोचा हो सकता है भगवान ने शायद उसकी बुद्धि पलट दी हो ।

राहुल उनसे कहने लगता है चलो आज बाहर घूम के आते हैं आज तुम्हे बाहर पार्क तक ले चलता हूं। पिछे से जय कहने लगता है मैं भी चलूंगा। राहुल उसे डांटकर मना कर देता। ब्रज भूषण राहुल से कहते हैं इसे भी ले चलो ना । राहुल कहता है आपको नहीं पता ये आपके लाड़ प्यार में बिगड़ गया है पढ़ता ही नहीं है। फिर वह जय को डांटता है और कहता है जाकर अंदर पढ़ो ।

राहुल फिर ब्रज भूषण को पकड़ – पकड़कर बाहर ले जाता है। वे ब्रज भूषण को गाड़ी में बैठने को कहता है। ब्रज भूषण पूछते हैं गाड़ी में बैठने की क्या जरूरत है पार्क तो पास में ही है। राहुल कुछ हड़ – बड़ाकर कहता है वो…मुझे थोड़ा काम करना है और वहीं पास में एक पार्क है… तो हम वहीं चलते हैं। इसी बातचीत के दौरान राहुल ब्रज भूषण को गाड़ी में बैठा देता है।

करीब आधे घंटे बाद वे लोग पार्क तक पहुंच जाते हैं राहुल ब्रज भूषण को गाड़ी से उतारता है और पार्क की एक बेंच पर बैठा देता । फिर राहुल एक पर्चे पर कुछ लिखता है और फिर ब्रज भूषण से कहता है इसे अपने पास रख लो इस में मेरा फोन नंबर है अगर जरुरत पड़े तो इस पर मुझे कॉल करा देना … मैं जरा काम कर के अभी आता हूं तब तक आप यहीं बैठे रहना। ब्रज भूषण हां में सिर हिला कर कहते हैं जल्दी आना।

पूरा एक घंटा बीत जाता पर राहुल नहीं आता । ब्रज भूषण सोचते हैं इतना समय हो गया परन्तु राहुल आया क्यों नहीं … वह सही तो होगा … ऐसा नहीं सोचना चाहिए मुझे… वह आता ही होगा। परन्तु एक घंटा और बीत जाता पर राहुल नहीं आता। तभी एक आदमी उनके पास आता है और उनकी बेंच पर बैठ जाता है और पूछता है क्या हुआ आप कुछ चिंतित लगते हैं । ब्रज भूषण पूछते हैं आपका परिचय… क्या आप मुझे जानते हो… क्या तुम्हे मेरे बेटे ने भेजा है?

वह व्यक्ति अपना परिचय देते हुए कहता है मेरा नाम जय है। ब्रज भूषण आश्चर्य से कहते हैं क्या तुम्हारा नाम … जय है… तुम्हे पता है मेरे पोते का नाम भी जय है। जय कहता है आप मुझे अपना ही समझिए… वैसे आप यहां क्या कर रहे हैं। ब्रज भूषण जय को पूरी बात बता देते हैं। जय कहता है तो आप मुझे अपना पर्चा दीजिए में आपके बेटे को कॉल कर देता हूं। ब्रज भूषण अपनी जेब से पर्चा निकाल कर जय को दे देते हैं।

जय वह पर्चा खोलता है। पढ़ते ही उसकी आंखो से आंसू निकलने लगते हैं । उस पर्चे में लिखा हुआ था ‘ ये मेरे पिता जी हैं जिन्हें भी मिलें वो इन्हें वृद्ध आश्रम में छोड़ दे ‘। जय सोचता है कि ऐसे सज्जन पुरुष जिन्हें दिखाई भी नहीं देता उनका बेटा उन्हें वृद्ध आश्रम छोड़ने की सोचता है। ब्रज भूषण पूछता है क्या हुआ कॉल लगीं कि नहीं। जय कहता है कि आप मेरे घर चलिए। ब्रज भूषण कहतें पर मैं तुम्हारे घर कैसे चलूं… मेरा बेटा आने वाला होगा। जय ना चाहते हुए भी पर्चे पर जो लिखा था वह पढ़कर ब्रज भूषण को सुना देता है।

ब्रज भूषण कहते हैं ठीक है तो बेटा तुम मुझे वृद्ध आश्रम छोड़ दो। जय कहता है नहीं आज से आप मेरे घर पर रहेंगे… मेरे पिता का देहांत हो चुका है तब से में अनाथ हूं पर आज आपको देखकर लगता है कि आपको मेरे लिए स्यंव भगवान ने भेजा है आप आज से मेरे पिता हैं। जय ब्रज भूषण को अपने साथ ले जाता है और वे खुशी खुशी रहने लगते हैं जय का परिवार ब्रज भूषण को अपने घर के बड़े के भांति स्वीकार कर लेते हैं और ब्रज भूषण भी उन्हें अपने परिवार की भांति प्रेम करने लगते हैं। जय का घर मानो स्वर्ग सा बन जाता है ।

वहीं दूसरी और राहुल के घर में रोज झगड़ा होने लगता है और राहुल को बिज़नेस में काफी नुकसान हो जाता है।

शिक्षा:- हमें अपने बुजुर्गों का सम्मान करना चाहिए,। उनके रहते है घर स्वर्ग रहता है ।

दोस्तों मुझे लगता है आपको मेरी कहानी पसंद आई होगी। अगर हां तो इसे लाइक, शेयर और सब्सक्राइब करें और हां अपने बड़े – बूढ़ों का सदा सम्मान करें।

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Man learns from mistakes

Hello readers, today I am presented with a new story whose characters are all fictional. The title of this story is ‘Man learns from mistakes’.

Ram Gopal Das had just got up that his wife Sumitra said to him in a loud voice, you just keep sleeping, you know how long the crop has been growing in the field. You do not have to worry about cutting it, you have to harvest the field, but you just sleep. And go and have a meeting at the crossroads, there is no point in working, they do not even think how the house will run.

Actually Ram Gopal Das was a farmer by profession but was also a good orator and everyone from the village used to take him to sit at the crossroads to talk on some topic.

Hearing Sumitra, he said, “Hey, why do you worry so much, the crop is yours, which is being run anywhere.” Sumitra said, oh you are mad, what will we do if a herd of animals enters the field and consumes the entire crop, or if it rains or a thunderstorm, the whole year’s hard work will go waste then we will live till the next crop How will

Ram Gopal said, “Nothing will happen … Well, first take a bath – I will wash and eat something, after that I will go out of the field and go to the laborers on the way.” Sumitra started saying that it is okay to heat the water and keep cooking, but quickly take a shower.

Ram Gopal ji walks from the food to the farm and walks on the way, he gets a delight. Ram Gopal ji used to say to his neighbor Manohar when it has not been three months since you will repay my loan. Manohar says sorry, he has not sold the crop yet, only when the crop is sold, I will pay your money. Ram Gopal says let’s go and let’s move forward.

On the way there is an intersection and some people of the village force them to sit and talk about a topic and talk – they do not know when it is evening. Sumitra started thinking at home why Ram Gopalji has not come so far, she does not send her 10-year-old son Jai to see where your father has stayed. Jai goes and sees that his father is talking about sitting at the crossroads. They go to him and tell that Sumitra has sent him to fetch them. Ram Gopal ji remembers that he had to go to harvest with the laborers… Now what will happen now, Sumitra will be very angry.

They enter the panicked house. As soon as Sumitra asks, the harvested crop will be sold tomorrow. Ram Gopal says hesitantly that the crop is not harvested. Sumitra asks with a surprising nature. Ram Gopal tells them the whole thing.

The next day, Sumitra wakes up Ram Gopal and quickly asks him to go to harvest. This time they walk again to the field, but this time the people at the crossroads ask them to stop but they refuse, then a man tells them that good bus stop for five minutes, what goes in five minutes. Ram Gopal ji thinks yes this thing also goes in the right five minutes. But they are so happy to talk that they do not know the time and the day is set again. Then Jay has to go to summon them.

Sumitra is very sad and thinks what to do now. She asks Jai to tell Manohar the whole thing. Manohar gives Jai a suggestion to teach Ram Gopal a lesson. He says that we reap the crop tonight and then tomorrow morning together with all the villagers, we will tell Ram Gopal ji that a bunch of Nilgai ate the entire crop. Jai comes home and narrates this suggestion to his mother. They then ask Jai to help Manohar in this task, with the help of laborers, to get the crop harvested at night and also to spread the rumor of animals.

The next day Sumitra does the same as suggested by Manohar, she woke up to Ram Gopal. She tells them that get up early everything is ruined, what shall we do now. Ram Gopal Harbadkar asks what happened. Sumitra says… nothing left… The Nilgaias destroyed everything. Ram Gopal gets scared and immediately runs to the farm. In front of his eyes, the crop of the field disappears, he weeps and asks the people nearby, what happened here, then people start saying that we heard that the Nilgai ate the whole crop. Sumitra comes from behind and says that she has seen the result of your negligence. Ram Gopal says you were right, I should have obeyed you, forgive me.

Sumitra says well now stop crying the crop is safe. And with this Sumitra tells the whole thing to Ram Gopal. Ram Gopal says now I understand that I will never make such a mistake from now on.

Readers, I hope you liked my story, if yes, like it, share it, and follow it.

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इंसान गलतियों से सीखता है

नमस्कार, पाठकों आज मैं एक नई कहानी के साथ प्रस्तुत हूं जिसके सभी पात्र काल्पनिक हैं। इस कहानी का शीर्षक है ‘ इंसान गलतियों से सीखता है ‘ ।

राम गोपाल दास अभी उठे ही थे कि उनकी पत्नी सुमित्रा ने उनसे तेज स्वर में कहा तुम बस सोते ही रहो तुम्हे पता है कि कितने दिनों से खेत में फसल उगी हुई पड़ी है। उसे काटने की तुम्हे कोई चिंता ही नहीं की खेत में फसल कटनी है पर तुम तो बस सो लो। और जाके चौराहे पर बैठक जमा लो काम से तो कोई मतलब ही नहीं ये भी नहीं सोचते की घर कैसे चलेगा

असल में राम गोपाल दास पेशे से एक किसान थे परन्तु एक अच्छे वक्ता भी थे और गांव के सब लोग उन्हें चौराहे पर बैठकर किसी ना किसी विषय पर बात करने के लिए ले जाते थे ।

सुमित्रा की बात सुनकर वे बोले अरे तुम इतनी चिंता क्यों करती हो फसल तो अपनी है कौनसी कहीं भागी जा रही है। सुमित्रा बोलीं अरे तुम तो पागल हो गए अगर कोई जानवर का झुंड खेत में घुसकर सारी फसल खा गया तो हम क्या करेंगे या फिर अगर बरसात हो गई या आंधी आ गई तो पूरे साल भर की मेहनत बेकार चली जाएगी फिर हम अगली फसल तक अपना गुजारा कैसे करेंगे।

राम गोपाल बोले अरे कुछ नहीं होगा… अच्छा में पहले जरा नहा – धो लूं और कुछ खा लूं उसके बाद खेत की ओर निकल जाऊंगा और रास्ते में से मजदूरों को ले जाऊंगा । सुमित्रा कहने लगीं ठीक है पानी गरम करती हूं और खाना बनाने रख देती हूं पर जल्दी नहा के निकल जाना।

राम गोपाल जी खाना खा के घर से खेत की ओर चल देते है रास्ते में उन्हें मनोहर मिल जाता है । राम गोपाल जी अपने पड़ोसी मनोहर से कहते अरे ओ मेरा उधार कब चुकाएगा तेरे तीन महीने नहीं हुए। मनोहर कहता है माफ करना वो जरा अभी फसल नहीं बिकी जब फसल बिक जाएगी तभी आपके पैसे चुका दूंगा । राम गोपाल कहते हैं चल ठीक है और आगे की और चल देते हैं।

रास्ते में चौराहा पड़ता है और गांव के कुछ लोग उन्हें जबरजस्ती बैठा लेते हैं और किसी विषय पर बात चलने लगती है और बात करते – करते उन्हें पता ही नहीं चलता कब शाम हो जाती है । सुमित्रा घर पर सोचने लगीं कि अब तक राम गोपाल जी आए क्यों नहीं वे अपनी 10 साल के बेटे जय को भेजती हैं कि जरा देख के आ तेरे पिता जी कहां रह गए। जय जाता है और देखता की उसे पिता जी तो चौराहे पर बैठे बात बना रहे हैं। वे उनके पास जाकर बताता है कि सुमित्रा ने उसे उन्हें लाने को भेजा है। राम गोपाल जी को याद आता है कि अरे उन्हें तो मजदूरों को लेकर फसल काटने जाना था… अब क्या होगा अब तो सुमित्रा बहुत नाराज़ होगी।

वे घबराए हुए घर में घुसते हैं। आते ही सुमित्रा पूछती हैं काट आए फसल अब बेचने कल जाओगे। राम गोपाल सकुचाते हुए कहते हैं फसल नहीं कटी । सुमित्रा आश्चरयजनक स्वभाव से पूछती हैं मतलब! राम गोपाल उन्हें पूरी बात बता देते हैं।

अगले दिन फिर सुमित्रा राम गोपाल को जगाती हैं और जल्दी से फसल कटने के लिए जाने को कहती हैं। इस बार वे फिर खेत कि और चल देते हैं परन्तु इस बार फिर चौराहे पर लोग उनसे रुकने को कहते हैं परन्तु वे मना कर देते हैं तब एक आदमी उनसे कहता है कि अच्छा बस पांच मिनट के लिए रुक जाइए पांच मिनट में क्या जाता है। राम गोपाल जी सोचते हैं हां ये बात भी सही पांच मिनट में क्या जाता है। परन्तु वे बात करने में इतने रम जाते हैं कि उन्हें समय का पता ही नहीं चलता और फिर से दिन ढल जाता है। फिर उन्हें बुलाने के लिए जय को जाना पड़ता है।

सुमित्रा बहुत दुखी होती हैं और सोचती हैं अब क्या किया जाए। वे जय से मनोहर को सारी बात बताने के लिए कहती हैं । मनोहर जय को राम गोपाल को सबक सिखाने का एक सुझाव देता है । वह कहता है हम आज रात ही फसल काट देते हैं और फिर कल सुबह सब गांव वालों के साथ मिलकर राम गोपाल जी को ये बताएंगे कि सारी फसल नीलगाय के एक झुंड ने खा ली। जय घर आकर ये सुझाव अपनी मां को सुना देता है। वे जय को फिर मनोहर के पास उसकी इस कार्य में मदद करने की कहती है कि वह मजदूरों कि मदद से रात को फ़सल कटवा दे और जानवरों वाली अफवाह भी फेला दे।

अगले दिन सुमित्रा मनोहर के सुझाव अनुसार ही करती हैं वह राम गोपाल को चिल्ला के उठाती हैं । वे उनसे कहती है कि जल्दी उठो हमारा सब कुछ बर्बाद हो गया अब हम क्या करेंगे। राम गोपाल जी हरबड़ाकर पूछते हैं क्या हुआ। सुमित्रा कहती है… कुछ नहीं बचा … नीलगायों ने सब तबाह कर दिया । राम गोपाल डर जाता है और तुरंत खेत की और भाग पड़ता है । उसकी आंखों के सामने खेत कि फसल गायब होती है वह रो पड़ता है और अास पास के लोगों से पूछता हैं यहां क्या हुआ था तो लोग कहने लगते है हम ने सुना कि नीलगायों ने सारी फसल खा ली। पीछे से सुमित्रा आती है और कहती है देख लिया तुम्हारी लापरवाही का नतीजा । राम गोपाल कहता है तुम सही कहती थीं मुझे तुम्हारी बात माननी चाहिए थी मुझे माफ़ कर दो।

सुमित्रा कहती हैं अच्छा अब रोना बंद करो फसल सुरक्षित है । और इसी के साथ सुमित्रा पूरी बात राम गोपाल को बता देती है । राम गोपाल कहते हैं अब मैं समझ गया हूं आगे से कभी ऐसी गलती नहीं करूंगा।

पाठकों मैं आशा करता हूं आपको मेरी कहानी पसंद आई होगा अगर हां तो इसे लाइक करें, शेयर करें, और फॉलो करें।

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हमारे कोरोना योद्धाओं की कोरोनावायरस और असामाजिक तत्वों के खिलाफ लड़ाई

पाठकों मेरे ब्लॉगिंग साइट पर वापस आपका स्वागत है। मैं आज एक नई कहानी के साथ प्रस्तुत हूं जिसका शीर्षक है ‘ हमारे कोरोना योद्धाओं की कोरोनावायरस और असामाजिक तत्वों के खिलाफ लड़ाई ‘

असली नायकों को सलाम


क्या आपने कभी कोरोना वायरस की इस महामारी के दौरान डॉक्टर की स्थिति के बारे में सोचा है? आज में एक इस से जुड़ी एक काल्पनिक कहानी लिख रहा हूं जो कुछ हद तक सच भी बयान करती है जिसकी मुख्य पात्र रीता हैं।

रीता एक डॉक्टर हैं और राष्ट्र की सेवा के लिए इस महामारी में काम कर रही हैं। उनके पति श्याम भी एक डॉक्टर हैं और महामारी में वे भी कम कर रहे हैं। उनकी 8 साल की एक बेटी महिमा है। अस्पताल प्रबंधन के निर्देशानुसार रीता और श्याम को घर जाने की अनुमति नहीं दी गई।

अब, उनकी बेटी के बारे में क्या … रीता ने महिमा की देखभाल के लिए अपनी पड़ोसी सारिका को फोन किया। उनकी पड़ोसी एक अच्छी महिला थी और वह महिमा को अपने घर ले गई और अपने बच्चों की तरह महिमा की देखभाल की।

अगले दिन रीता ने महिमा को video call किया और उसे बताया कि वह और उसके पिता जल्द ही आ जाएंगे, तब तक वह खुद का ख्याल रखे और सारिका को परेशान न करे। महिमा ने वादा किया कि वह सारिका आंटी को परेशान नहीं करेगी। रीता ने महिमा को यह भी बताया कि वे कोरोना पॉजिटिव को अस्पताल ले जाने के लिए दिल्ली के पूर्वी हिस्से में जा रही थीं और कहा कि मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूं।

कुछ घंटों बाद महिमा, सारिका और उनके बच्चे समाचार देख रहे थे और उन्होंने देखा कि समाचार चैनल ब्रेकिंग न्यूज़ को टैग कर रहा था कि दो डॉक्टर और दो नर्स पूर्वी दिल्ली इलाके में कोरोना पॉजिटिव को लेने गए परन्तु उसके परिवार के सदस्यों और कुछ पड़ोसियों ने उन पर पत्थरबाजी कर दी। इस खबर के साथ महिमा ने सारिका को बताया कि उसकी मां ने बताया था कि वह पूर्वी दिल्ली जा रही थी … सारिका ने तुरंत रीता को फोन करने की कोशिश की … लेकिन उसने फोन नहीं उठाया। अब तनाव और अधिक बढ़ गया। सारिका ने रीता के पति को फोन करने की कोशिश की। उन्होंने फोन उठाया और वे रो रहे थे और धीमी आवाज में बोल रहे थे … सारिका समझ गई कि कुछ गलत हुआ है। उसने पूछा कि क्या हुआ … श्याम ने जवाब दिया कि महिमा अस्पताल में भर्ती है क्योंकि उसे सिर में चोट लगी है और अब ऑपरेशन थियेटर में है … फोन कट गया।

सारिका ने कहा, ओह! मेरा फोन…नहीं… कट गया … महिमा ने पूछा कि क्या हुआ आंटी… मेरी मम्मी। सारिका ने कुछ देर सोचा और फिर कहा कि तुम्हारी मम्मी ठीक हैं … आखिर वे एक कोरोना योद्धा हैं और आपके पिताजी भी उसके साथ हैं … तुम परेशान मत हो … आओ तुम्हारी माँ की अच्छी स्थिति के लिए भगवान से प्रार्थना करें। सारिका महिमा को अपने पूजाघर की ओर ले गई। उन्होंने दीपक जलाया और वे रीता के लिए प्रार्थना करने लगे।

लगभग आधे घंटे के बाद श्याम ने सारिका को वापस कॉल की इस बार वह रो नहीं रहे थे। श्याम ने सारिका को बताया कि ऑपरेशन सफल है और पांच दिनों के अवलोकन के बाद उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी जाएगी और वह घर आ जाएगी। पीछे से महिमा की आवाज आई उसने पूछा कि क्या हुआ आंटी। सारिका ने जवाब दिया कि सब ठीक है हमने भगवान से प्रार्थना की थी ना … जल्द ही तुम्हारी माँ घर आ जाएंगी और तुम उनसे मिलोगी। महिमा ने खुशी से कहा ओह! सचमुच आंटी , माँ आ रही हैं। सारिका ने महिमा के सर पर हाथ फेरा ! हाँ, मेरी बेटी जल्दी ही तुम्हारी मम्मी तुम्हारे साथ होंगी।

पांच दिनों के बाद रीता को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई और जब वह कॉलोनी में दाखिल हुई तो उनके सभी पड़ोसी रास्ते में ताली बजाते हुए खड़े थे और उस पर फूल फेंक रहे थे। और सामने की तरफ एक छोटी सी लड़की खुशी से माँ पुकारती हुई आई। जैसे ही वह रीता के पास पहुंची, उसने उसे गले लगाया और कहा कि मैंने तुम्हें याद किया है, लेकिन सारिका आंटी ने मुझे बहुत प्यार दिया। रीता ने सारिका को धन्यवाद दिया। सारिका ने कहा कि तुम क्या कर रही हो … मैंने क्या किया है … महिमा मेरी बेटी की तरह है … तुम्हें धन्यवाद देने की जरूरत नहीं है … बस अपना ध्यान रखना और मुझे फोन करना अगर तुम्हें कुछ भी चाहिए होगा।

पाठकों आप ने लोगों की सोच में अंतर देखा? कुछ लोग वे हैं जो सम्मानजनक कोरोना वॉरियर्स पर पत्थर फेंकते हैं और कुछ ऐसे हैं जो कोरोना वारियर्स का सम्मान करते हैं और फूल फेंकते हैं। तो सोचिए हमें पत्थर फेंकने वालों की जरुरत है या फूल फेंकने वालों की जरूरत है। पत्थर फेंकने वाले लोग समाज … राष्ट्र … के दुश्मन हैं। दुनिया में उन्हें कोई अधिकार नहीं दिया जाना चाहिए और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए और उन्हें कोई वस्तु उपलब्ध नहीं कराई जानी चाहिए।

मुझे उम्मीद है कि पाठकों आपको कहानी पसंद आई होगी और आप कोरोना योद्धाओं का समर्थन और सम्मान करेंगे और राष्ट्र का समर्थन करेंगे। यह कहानी कोरोना योद्धाओं और राष्ट्र के प्रति मेरा बहुत छोटा सा धन्यवाद है।

अगर आपको मेरी कहानी पसंद है तो इसे लाइक करने की जरूरत नहीं है और मेरे ब्लॉग साइट को फॉलो करने की भी जरुरत नहीं है , अगर आप कुछ करना ही चाहते हैं तो यदि आप समर्थ हो तो ‘पीएम-केयर फंड’ में राष्ट्र के साथ कोरोना वायरस से लड़ने के लिए योगदान दें और हां लॉकडाउन का समर्थन करें यह मेरे … आपके लिए नहीं … यह पूरे देश के लिए है ।

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Our corona warriors fight against corona virus and some evils of Nation

Hey readers welcome back to my blogging site. I am back here with a new story with title ‘ Our corona warriors fight against corona and some evils of nation’

Salute to the real heroes

Have you ever wondered about the doctor’s situation during this pandemic of corona virus ? Let me tell you about a fictional story related to this related to a doctor named Reeta.

Reeta is a doctor and is enforced in this pandemic to serve for nation. She have a family, his husband Shyam is too a doctor and also enforced in pandemic. They have a daughter Mahima of 8 years . Reeta and Shyam were not permitted to go to home as instructed by hospital management.

Now, what about their daughter… Reeta called up on their neighbour Sarika to take care of Mahima. Their neighbour was a nice lady and she took Mahima to their house and care her as likewise to her children.

Next day Reeta video called Mahima and tell her that she and his dad will come soon till than she should take care of herself and ensure not to disturb Sarika . Mahima promised that she will not disturb Sarika aunt. Reeta also told Mahima that they were going to eastern part of Delhi to take corona positive to hospital and said a lots of love to you.

Few hours later Mahima, Sarika and her children were watching news and they saw that news channel was tagging breaking news that two doctors left to Eastern Delhi and family members of corona positive and some of neighbours have thrown upon pebbles on them…. with this news Mahima told Sarika that her mother told that she was going to eastern Delhi… Sarika immediately tried to call Reeta … but she didn’t picked up the phone . Now tension grown up more. Sarika tried Reeta’s husband phone . He picked up the phone and was crying and speaked with a low voice… Sarika understood that something had happened wrong. She asked that what happened… Shyam replied that Mahima is admitted to hospital as she had got head injury and is now in Operation Theatre… phone disconnected.

Sarika exclaimed oh!no my phone got disconnected… Mahima asked what happened aunty….my mom. Sarika thought for a while and then said that your mom is all well afterall she is a warrior… a corona warrior and your dad is with her… you don’t take tension… let’s pray to God for your mother’s well condition. Sarika took Mahima to her worship place . She lit up Deepak and they started praying for Reeta.

After about half an hour Shyam called back Sarika this time he was not crying. Shyam told Sarika that operation is successful and after five days of observation she would be discharged from hospital and will come to home. Mahima voice came from back she asked what happened aunt. Sarika replied my child all is well as we prayed to God soon your mom will come to home and you would meet her. Mahima exclaimed with joy oh! Really aunty mom is coming. Sarika patted her head oh! yes my child don’t you worry soon she would be with you.

After five days Reeta was discharged from hospital and as she entered in colony all her neighbours were standing in the pathway clapping and throwing flowers on her . And fro the front way a little girl came running with joy calling mom. As she reached Reeta she hugged her and said I missed you mom but Sarika aunty gave me a lot of love but than also I missed you. Reeta thanked Sarika. Sarika said what are you doing…what I have done… Mahima is like my own child…you not need to thank… just take your care and call me upon if you would need anything.

Now, readers have you seen difference in thinking of people some people are those who throws pebbles on the respectable corona virus who are working day night for the nation and some are those who respect corona virus and threw flowers. So think what we need pebbles throwers or flower throwers. Pebble throwers are enemy of society… nation…world they should not be given any right and a strict action should be taken against them and no commodities should be provided to them.

I hope readers you would like the story and would support and respect corona warriors and would support nation. This story is my very small thanks towards corona warriors and nation.

If you like my story no need to like this and follow my blog site just if you are able donate in ‘PM-Cares Fund’ to fight against corona virus with nation and yes support lockdown it’s not for me…you… it’s for whole nation.

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किसी निर्दोष को नहीं मारना चाहिए

नमस्ते, पाठकों आपका मेरे ब्लॉग पोस्ट पर स्वागत है। आज मैं एक नई कहानी के साथ प्रस्तुत हूं जिसका शीर्षक है ‘ निर्दोष और मूक प्राणियों को मारना नहीं चाहिए।

एक बार अनुराग नाम का एक लड़का रहता था। वह बचपन से मासूम चींटियों को मारता था। उसे चींटियों से दुश्मनी सी थी जब भी वह चींटियों को देखता था तो वह आमतौर पर चींटियों को किसी भी ईंट या चट्टान या कभी-कभी चप्पल के नीचे कुचलकर मार देता था।

उसके माता-पिता उसे सलाह देते थे कि वे ऐसा न करें … निर्दोषों की हत्या न करें … अन्यथा भगवान उसे सजा देंगे। लेकिन अनुराग ने अपने माता-पिता की सलाह नहीं सुनी और चींटियों को मारना जारी रखा।

वह बड़ा हो गया, लेकिन निर्दोष चींटियों को मारने की गतिविधि नहीं रोकी। उनके माता-पिता अब उसे सलाह देने से थक गए थे क्योंकि वह अपने माता-पिता की सलाह पर कोई ध्यान नहीं देते था और हमेशा की तरह करते रहे।

एक दिन अनुराग ने अपने माता-पिता से फार्महाउस जाने के लिए कहा, परन्तु उसके माता – पिता ने कहा कि तुम अकेले जा सकते हैं हम तुम्हारे साथ नहीं आ सकते। अगले दिन अनुराग फार्म हाउस जाने लगा । उसे फार्म हाउस में तीन दिन बिताने थे, लेकिन भगवान ने कुछ और तय किया था।

उसके फार्म हाउस में दूसरे दिन के दौरान, क्षेत्र में भूकंप का अनुभव हुआ, सभी लोग अपने आप को बचाने के लिए अपने घर से बाहर निकलने लगे लेकिन किसी तरह अनुराग उसके फार्महाउस में अवरुद्ध हो गया। लगभग बीस मिनट के भूकंप के बाद, उसका फार्महाउस ढह गया और वहां से एक चीख आई। एक या दो मिनट के बाद भूकंप रुक गया और अनुराग के पड़ोसियों ने अनुराग को फार्महाउस से बाहर निकालने के लिए जेसीबी को बुलाया।

जैसे ही फार्महाउस के अवशेषों को साफ किया गया, अनुराग का मृत शरीर मिला। पड़ोसियों ने अनुराग के माता-पिता को फोन किया। वे 3 घंटे के भीतर आ गए। आगमन के साथ वे रोने लगे और कहा कि हमने उसे निर्दोष चींटियों को न मारने की सलाह दी थी, लेकिन उसने हमारी सलाह पर ध्यान नहीं दिया और अब …

तो क्या अपने देखा था कि जो निर्दोष को मारता है वह किसी भी तरह से भविष्य में भुगतता है .. भगवान उसे ऐसे ही जाने नहीं देता। भूकंप में केवल अनुराग मलबे के नीचे दब गया, जो ईंटों से बना था क्योंकि उसने बचपन से चींटियों को मारता आ रहा था और हां केवल अनुराग को मृत्युदंड मिला था। भूकंप से कोई और बहुत अधिक प्रभावित नहीं हुआ था।

नैतिक -: किसी निर्दोष को नहीं मारना चाहिए, अन्यथा अंत में भुगतना पड़ता है।

पाठकों, मुझे आशा है कि आपको कहानी पसंद आई होगी यदि हाँ तो कृपया इसे लाइक, शेयर और हाँ मेरी साइट को फॉलो करें।

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One should not kill innocent ones

Hi, readers welcome back to my blog post. Today I am back with a new story with title ‘One Should not kill innocent ones’. To see video: https://youtu.be/dBz4DXnOmmw

Once there lived a boy named Anurag. He used to kill innocent ants from childhood. He had some enmity to ants whenever he used to see ants he usually used to kill ants by crushing them below any brick or rock or sometimes his slippers.

His parents used to adviced him not do so… not to kill innocent ones…otherwise God would give him punishment. But Anurag didn’t listened to his parents advice and continued to kill ants .

He began to grow up but didn’t lose the activity of killing innocent ants . His parents now got tired from advising him because he didn’t used to pay any attention towards his parents advice and continued to do as usual.

One day Anurag asked his parents to go to farmhouse his parents said you can go alone we can’t come with you. Next day Anurag left to farm house. He was to spent three days in farm house but God had decided something other than that.

During the second day in his farm house , area experienced a earthquake all people started to came out of their house to save themselves but somehow Anurag got blocked in his farmhouse. After about twenty minutes of earthquake, his farmhouse got collapsed and a scream came out from there . After a minute or two earthquake got stopped and neighbours of Anurag called JCB to clear out remaining of Anurag’s farmhouse.

As the remainings of farmhouse were cleared there was dead body of Anurag. Neighbours called upon parents of Anurag. They came within 3 hours. With the arrival they started crying and said that we had advised him not to kill innocent ants but he didn’t paid attention to our advice and now…

So had you seen how one who kills innocent would suffer anyhow.. God does not let him go. In the earthquake only Anurag got to death under rubble which was made up of bricks as he killed ants from childhood and yes only Anurag got death restwhile area was not much affected by earthquake.

Moral -: One should not kill innocent ones, otherwise ultimately would suffer.

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किसी भी परिस्थिति में धैर्य नहीं खोना चाहिए

नमस्ते, पाठकों आपका मेरे ब्लॉग साइट पर स्वागत है। मुझे उम्मीद है कि आप सभी अच्छा होंगे। मैं एक नई कहानी के साथ उपस्थित हूं जिसका शीर्षक है ‘किसी भी परिस्थिति में धैर्य नहीं खोना चाहिए’

एक बार गोपाल और मोहन नाम के दो दोस्त रहते थे। वे दोस्त थे लेकिन स्वभाव से थोड़े से अलग थे गोपाल बहुत शांत थे और धैर्य के साथ स्थिति को संभालता था लेकिन मोहन स्वभाव से बहुत अधिक उग्र था।

हम यह भी कह सकते हैं कि एक शांत पानी की तरह था और एक आग की तरह था लेकिन फिर भी वे अच्छे दोस्त थे क्योंकि उनके पास बहुत सी समानताएं थी जो उनके प्रेम का बंधन दिखती थीं

एक दिन वे पास के जंगल में गए। मोहन ने एक सुंदर फल देखा जो उसने पहले कभी नहीं देखा था और फल की ओर इशारा किया और कहा कि चलो उस ओर जाते हैं और देखते हैं कि यह क्या है। गोपाल ने कहा कि यह सच नहीं हो सकता … यह एक जाल हो सकता है या यह जहरीला हो सकता है। मोहन ने गुस्से में तर्क दिया ओह! तुम दिल से बहुत कमजोर हैं … तुम मेरी तरह बहादुर नहीं हो । गोपाल ने कहा कि यह सच नहीं है कि मैं कमजोर हूं, लेकिन एक व्यक्ति को अपने दिमाग का इस्तेमाल करना चाहिए। मोहन ने फिर तर्क दिया मुझे पता है तुम बहुत कायर हो मैं इसे फल को तोड़ने जा रहा हूं।

मोहन फल पाने के लिए चला गया लेकिन जैसे ही वह उस फल की ओर बढ़ा कि उसका पैर रस्सी में फंस गया। वह रोने लगा। गोपाल ने कहा अब तुम्हारी बहादुरी कहाँ है। मोहन ने कहा कि क्षमा मुझे क्षमा कर दो मुझे तुम्हारी बात माननी चाहिए थी। गोपाल ने कहा कि तुम्हे मुझसे माफ़ी मांगने की जरूरत नहीं है मैं आपका दोस्त हूं और रोना बंद कर दो अन्यथा वह व्यक्ति आ जाएगा जिसने इस जाल को बनाया होगा और हमें इस डर से पकड़ सकता है कि हम कहीं पुलिस को न बुलाएं ।

मोहन ने रोना बंद कर दिया और मन्द स्वर में कहा लेकिन अब हमें क्या करना चाहिए। गोपाल ने कहा चिंता मत करो मैं तुम्हें बचा लूंगा लेकिन मुझे तुम्हारी गाँठ खोलनी होगी या रस्सी कटनी होगी परंतु अगर मैं इसे किसी भी तरह से करूँगा तो तुम अपने सिर के बल गिर जाओगे और तुम्हें चोट लग सकती है … ओह! हाँ मुझे एक विचार आया कि हम बैठने के लिए एक बेड शीट और फल काटने के लिए एक चाकू लाए थे और हाँ हमारे पास दो बैग हैं जिसमें हमने यह सब रखा था।

मोहन ने पूछा लेकिन तुम इसका उपयोग कैसे करोगे? उन्होंने कहा कि मैं जमीन पर दोनों बैग रखूंगा और उस पर तीन-चार तय में बेडशीट रखूंगा, जो तुम्हारे सिर को चोट से बचाएगा। अब अपना बैग फेंको। (मोहन ने बैकपैक फेंका)। (गोपाल ने उसे पकड़ लिया)। फिर अपने अनुसार सभी चीजों को रखा और पेड़ पर चढ़ गया और रस्सी काट दी। गोपाल मोहन को बचाने में सफल हो गया। मोहन ने गोपाल को थैंक्स और सॉरी कहा। गोपाल ने दोहराया कि तुम्हें यह कहने की आवश्यकता नहीं है और वे सफलतापूर्वक अपने घर चले गए।

शिक्षा : किसी भी परिस्थिति में धैर्य नहीं खोना चाहिए।

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  • समय का मूल्य
    किसी शहर में एक छोटा सा परिवार रहा करता था। वह परिवार बहुत सुखी परिवार था । सभी लोग आपस में मिलजुल कर रहा करते थे। परिवार में कुल 5 सदस्य थे। सास ,ससुर, बेटा, बेटी और बहू। सास का नाम मीरा और उसकी बेटी का नाम कावेरी था और बहू का नाम सुनीता था।… Read more: समय का मूल्य
  • नौकरी वाली बहू
    किसी शहर में एक शीला नाम की महिला रहा करती थी उसका एक भरपूर भरा पूरा परिवार था । उसके दो बेटे एक बेटी थी सब कुछ खुशहाल था वह अपने बड़े बेटे के लिए रिश्ता तलाश कर रही थी और वह चाहती थी कि उसे एक घरेलू पढ़ी लिखी लड़की मिले । वह अपने… Read more: नौकरी वाली बहू
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    Once upon a time two brothers who lived on adjoining farms fell into conflict. It was the first serious rift in 40 years of farming side by side, sharing machinery and trading labor and goods as needed without a hitch. Then the long collaboration fell apart.It began with a small misunderstanding and it grew into… Read more: Bridge of happiness
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Patience is the ultimate weapon

Hi , viewers welcome back to my Blog site. I hope you all are doing well. I am here with a new story with topic ‘Patience is the ultimate weapon’. See video:https://youtu.be/cById7LKbzg

Once there lived two friends named Gopal and Mohan. They were friends but somewhat different in nature Gopal was very calm and handles situation with patience but Mohan was very overpowering from nature.

We can also say that one was like coolwater and one was like fire but yet they were good friends because they had various similarities rather than nature and had a true bond.

One day they went on to nearby jungle . Mohan noticed a beautiful fruit which he had not seen ever earlier and get it.

Mohan went on to get fruit but as he moved towards it his leg got caught in a rope . He began crying. Gopal said now where is your bravery. Mohan said sorry I had to follow your instructions. Gopal said you need not to say sorry to me I am your friend afterall and stop crying otherwise person will come who had made this trap and could caught us with the fear that we would call police.

Mohan stopped crying and in weak voice said but now what should we do . Gopal said don’t worry I will save you but… I had to open your knot but if I will do it anyhow you will fall by your head and you could be hurted … Oh! Yes I have an idea we had brought a bed sheet to sit on that and a knife to cut fruits and yes we have two backpacks in which we had kept all this.

Mohan asked but how will you use this. He said that I will sat two backpacks on the ground and will place bedsheet in three-four folds on that which would save your head on falling. Now throw your backpack . (Mohan throws backpack). (Gopal catched it). Then placed all things accordingly and climbed up on tree and cut the rope. Gopal became successful to save Mohan . Mohan said thanks and sorry to Gopal . Gopal repeated that you need not to say these lines and they went on to their home successfully.

Moral : One should not lose patience in any situation.

I hope viewers that you would like the story. If yes than please don’t forget to like, share and follow my blog site.

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अहंकार मानव का परम शत्रु है

पाठकों, मैं फिर से एक और कहानी के साथ वापस हूं जो एक इंसान के अहंकार से संबंधित है।

एक बार एक लड़का श्याम था। वह बहुत ज्यादा बुद्धिमान था। उसने हर परीक्षा में हर विषय में लगभग पूर्ण अंक प्राप्त किए और विद्यालय का सबसे प्रतिभाशाली छात्र था। यहाँ तक कि वे सहसंयोजक गतिविधियों में भी लगा हुआ था और अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करता था।

उनके माता-पिता और सभी रिश्तेदार हमेशा उनके अच्छे प्रदर्शन के लिए उनकी प्रशंसा करते थे। माता-पिता उसे अपना अधिक प्यार देते थे। वर्ष बीत गए और श्याम ने हमेशा की तरह एकेडमिक्स में और विश्वविद्यालय में भी सर्वश्रेष्ठ छात्र और सभी शिक्षकों का प्यारा था।

समय बीतने के साथ श्याम को अहंकार आ गया अब उसे विश्वास हो गया कि कोई भी उसके अनुकूल नहीं है। अब श्याम का नौकरी करने का समय आ गया । इसलिए वह नौकरी के लिए इंटरव्यू में उपस्थित हुए लेकिन उन्होंने कुछ भी अभ्यास नहीं किया क्योंकि उनका मानना ​​था कि उन्हें नौकरी अवश्य मिलेगी लेकिन यह उनका आत्मविश्वास नहीं था, यह उनका अति आत्मविश्वास और अहंकार था कि कोई भी उनके लिए संगत नहीं है।

लेकिन वह इस बार असफल हो गया, वह साक्षात्कार में नहीं चुना गया था, लेकिन फिर भी इसका मतलब यह नहीं था कि उसने यह सोचा था कि यह काम मेरे लिए उपयुक्त नहीं था, उसने सोचा कि यह नौकरी बेकार थी और कंपनी का मालिक भी मूर्ख था। उन्होंने यह नहीं माना कि यह उनकी गलती थी कि उन्होंने बस कंपनी और नौकरी को दोषी ठहराया।

अब दूसरी नौकरी के लिए साक्षात्कार का समय था, लेकिन परिणाम और अभ्यास पहले साक्षात्कार के जैसा ही था। दिन बीते … अवसर गए …। लेकिन परिणाम शून्य था। अब बिना किसी नतीजे के एक साल बीत गया। अब श्याम सोचने लगा कि मेरे जैसे प्रतिभाशाली छात्र के लिए ऐसी असफलताओं का कारण क्या है।

वह अपनी मां के पास गया और इस बारे में पूछा। उन्होंने पूछा कि ऐसी विफलताओं का कारण क्या है। उनकी माँ ने मुस्कुराते हुए कहा कि यह कंपनी के मालिकों की गलती नहीं है और न ही यह भगवान को दोष देने के लिए आपकी सभी गलती है …आपका अहंकार … आपका अति आत्मविश्वास। अब श्याम को सारा मामला समझ में आया। उन्होंने अपनी मां से इस तरह की विफलताओं के लिए माफ़ी मांगी और वादा किया कि अब वह कड़ी मेहनत करेंगे और सफल होंगे।

इस बार उन्होंने अगले साक्षात्कार के लिए अभ्यास किया और बड़े प्रयासों के साथ साक्षात्कार में भाग लिया और इस बार परिणाम उनके पक्ष में था। उसे आखिरकार नौकरी मिल गई।

नैतिक- अहंकार मानव का परम शत्रु है, जो केवल असफलताओं की ओर ले जाता है।

पाठकों मुझे उम्मीद है कि आपको यह कहानी पसंद आएगी ।अगर हाँ तो कृपया इसे लाइक करें, मेरे ब्लॉग साइट को फॉलो करें, ब्लॉग को शेयर करें।

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