नमस्ते, पाठकों स्वागत है आपका मेरी ब्लॉग साइट पर में आज आपके लिए लेकर आया हूं एक नई कहानी जिसका शीर्षक है ‘औरत का घर में महत्व ‘ । इस कहानी के सारे पात्र काल्पनिक हैं।
जय उठकर बैठा और सोचा आज मां क्यों उठाने नहीं आई। अब तो 10:25 बज गए और स्कूल भी छूट गया पर मां आज उठाने क्यों नहीं आई। फिर वह यह सोचते – सोचते बेड से उठकर बाहर हॉल की तरफ जाता है और आवाज़ लगाता है मां ओ मां कहां हो आप मुझे आज उठाया क्यों नहीं मेरा स्कूल छूट गया अब कल मुझे स्कूल में डांट पड़ेगी।
उसकी मां की तो कोई आवाज नहीं आई पर उसके पिता जी की आवाज़ आई अरे क्या हुआ इतनी सुबह – सुबह क्यों चिल्ला रहा है। मेरी नींद पूरी नहीं होगी तो ऑफिस में नींद आइगी। जय अपने माता – पिता के कमरे में जाता है तो पाता है कि वहां केवल उसके पिता जी हैं मां तो है ही नहीं। वह अपने पिता को जगाता है । राजेश उठता है और कहता है क्या हुआ है इतना क्यों चिल्ला रहा है । जय रोते – रोते कहता है की मां कहां गई। राजेश आश्चर्य से अपने साइड में देखता है तो वहां वाकई में रमा नहीं थी। अब राजेश को भी टेंशन हो जाती है।
फिर वह दौड़ कर दूसरे कमरों में रमा को ढूंढने जाता है पर रमा किसी भी कमरे में नहीं मिलती। उसके बाद वह कॉलोनी में रमा के बारे में पूछताछ करता है पर निराश होकर ही वापस आता है । अब टेंशन और बढ़ जाती है । रमेश देखता है कि रमा का फोन भी घर पर नहीं है। वह सोचता है क्यों ना रमा को फोन मिला कर देखा जाए । रमेश रमा को फोन मिला कर देखता है। फोन उठ जाता है दूसरी ओर से रमा की आवाज आती है क्या हुआ फोन क्यों किया। अब जाके रमेश को थोड़ी चैन कि सांस आती है। रमेश पूछता है कि तुम कहां थी। रमा कहती है में आज अपने मायके आ गई। रमेश हड़बड़ाकर पूछता है क्यों…वहां सब ठीक तो है…तुम वहां कैसे गईं। रमा कहती है यहां तो सब ठीक है…मेरी मां मुझे बहुत दिनों से बुला रही थी पर में तुम लोगों की चिंता में नहीं जा पा रही थी पर कल जब तुम लोगों ने कहा कि में कुछ करती है नहीं हूं और मेरा घर पर कोई काम ही नहीं तो मैंने सुबह ही भैया को बुला लिया और यहां आ गई । कल सुबह वापस आ जाऊंगी।
रमेश और जय को अब अपनी बात पर ग्लानि हुई। उनके लिए अगली सुबह तो क्या शाम भी रमा के बिना काटनी भारी हो गई । उन्होंने फिर से रमा को फोन मिलाया और रमा से माफी मांगी और जल्दी वापस आने को कहा। रमा कहती है मुझे भी तुम लोगों की बहुत याद आ रही थी और सोचती थी की तुम मेरे बिना कैसे रह पाए होगे…कुछ खाया होगा या नहीं। दरवाजा खोलो में बस दो मिनट में आ रही हूं। रमा आती है। उसके आते ही राजेश और जय उससे माफी मांगते और कहते है आगे से हम कभी ऐसी गलती नहीं करेंगे। रमा कहती है ठीक है पर मैंने भी शायद तुम्हे सबक सिखाने के लिए ज्यादा ही कर दिया। फिर राजेश कहता है आज हम दोनों ने YouTube से देखकर खाना बनाया है । तुम हाथ धो लो फिर साथ में खाएंगे। फिर वे तीनों मिलकर खाना खाते हैं। आज के बाद वे लोग कभी नहीं लड़े।

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