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वह मनोरम सफर

नमस्ते , पाठकों स्वागत है आपका मेरी ब्लॉग साइट पर। आज मैं आपके लिए लेकर आया हूं एक नई कहानी जिसका शीर्षक है ‘वह मनोरम सफर ‘ । इस कहानी के सारे पात्र काल्पनिक हैं।

रोहित बहुत उत्साहित था क्योंकि कल सुबह वह सिक्किम घूमने के लिए निकलने वाला । उसका उत्साह इतना था कि रात को वह सो भी नहीं पाया । वह बस कल के बारे में सोचता रहा। ख़ैर जैसे तैसे दो मिनट को आंख लगती है तभी फोन की घंटी बजती है । रोहित फोन उठाता है दूसरी ओर से आवाज़ आती है अरे!अभी तक सो रहा है क्या…जल्दी उठ कर तैयार हो जा… मैं बस आधे घंटे में पहुंच रहा हूं … उसके बाद सिक्किम की ओर निकल जाएंगे । रोहित कहता है मोहित तू उठने की बात करता है मैं तो पूरी रात उत्साह के कारण सो ही नहीं पाया।

मोहित कहता है चल अब बात मत कर तैयार हो जा मैं बस आधे घंटे में आने वाला हूं।

रोहित जल्दी से तैयार होकर मोहित के इंतजार में बैठ जाता है। पूरे तीन साल बाद रोहित कहीं घूमने जा रहा था उसकी खुशी का तो कोई ठिकाना ही नहीं था। मोहित पहले भी सिक्किम घूम कर आ चुका था परन्तु रोहित के लिए यह सफर नया था इसलिए उसका उत्साह मोहित से ज्यादा था। पांच मिनट बाद ही मोहित आ जाता है और वे सिक्किम के लिए निकल जाते हैं। यूं तो वे दोनों हवाईजहाज से या ट्रेन से भी जा सकते थे परन्तु उन्होंने प्रकृति का भरपूर आनंद लेने के लिए गाड़ी से जाना पसंद किया।

गाड़ी से गंतव्य तक पहुंचने में उन्होंने खूब मजा लिया। वे पेड़-पोधों भरा आनंदपूर्ण दृश्य देखते हुए सिक्किम पहुंच गए।

सिक्किम पहुंचे तो दृश्य और निखरता जा रहा था वहां का प्राकृतिक दृश्य उन्हें मोहित सा कर रहा हो परन्तु अभी उनका गंतव्य कुछ और दूर था उन्हें तो अभी गंगटोक शहर तक जाना था क्योंकि रोहित ने सुना था कि वह शहर स्वर्ग के भांति प्रतीत होता है। वे लोग गंगटोक के लिए रवाना हो गए रास्ते का मनोरम चित्र देखकर उनके मन में हर्ष कि लहर दौड़ गई । रास्ते में कई झरने पड़े कुछ तो जैसे ऊपर आसमान से ही आ रहे हों ऐसे ही एक झरने पर वे लोग रुक गए। रोहित वहां पड़े एक पत्थर पर बैठकर झरने के दृश्य का आनंद लेने लगा वहां इसे ऐसा लगा मानो ये जगह स्वर्ग हो इतना सुन्दर कल-कल बहता झरना ,हरी-भरी वादियां और बादल जैसे जमीन को छू रहे हों। ऐसा चित्र देखकर रोहित का मन गद- गद हो गया। मानों अब कोई इच्छा शेष ही ना रह गई हो। कुछ देर बाद मोहित बोला चलो अभी तो और ऊपर गंगटोक तक जाना है।

गंगटोक शहर

रोहित सोचने लगा यदि यह दृश्य ही उसे स्वर्ग के भांति लग रहा है तो ऊपर गंगटोक में तो मन तृपत हो जाएगा। वे लोग गंगटोक के लिए चल देते हैं। जैसा सोचा था वैसा ही पाया ऐसा लग रहा था कि इस से सुन्दर धरती पर कुछ हो ही नहीं सकता । रोहित वहां के नजारे का मजा लेने लगा। वे लोग दो दिन के लिए वहां रुके। दो दिन बाद भी उन दोनों का वहां से जाने का मन ही नहीं कर रहा था पर क्या के सकते थे ऑफिस की छुट्टियां खत्म होने वाली थी।ना चाहते हुए भी उन्हें वापस आना पड़ा। अब भी रोज रात को वे दोनों उन पुरानी यादों को ताज़ा करने के लिए फोटो देखने लगते हैं। फिर सोचते हैं आखिर अब कब वहां वापिस जाना होगा…

पाठकों मुझे लगता है कि आपको कहानी पसंद आती होगी और आपका भी वहां घूमने जाने का में किया होगा। अगर कहानी पसंद आई हो तो इसे लाइक,शेयर और फॉलो करें।

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