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ह्रदयविदारक घटना

नमस्ते, पाठकों स्वागत है आपका मेरी ब्लॉग साइट पर। आज में आपके लिए एक नई कहानी के साथ हूं जिसके सारे पात्र काल्पनिक है परन्तु यह कहानी सच को दर्शाती है और सच्ची घटना से नाता रखती है। कहानी को वीडियो में देखिए- https://youtu.be/XCTUWTY1oAQ

मनोहर लाल आज सुबह के समय बैठकर समाचार देख रहे थे तभी उनकी नजर नीचे आ रही एक ब्रेकिंग न्यूज पर पड़ी उसमें लिखा हुआ था ‘ महाराष्ट्र सरकार का हत्याकांड ‘ साथ ही उसके प्रसारण का समय लिखा था सुबह 10:05 । तुरंत ही उनकी नजर घड़ी पर पड़ी देखा तो अभी समय था सुबह के 9:50 । अब उन्हें खबर जानने की जिज्ञासा होने लगी। सोचा कि थोड़ा चैनल आगे-पीछे करके देखा जाए। क्या पता किसी और चैनल पर यह न्यूज आ गई हो।

उन्होंने आगे-पीछे करके देखा हर चैनल पर न्यूज कि ब्रेकिंग न्यूज दर्शाई जा रही थी परन्तु हर किसी चैनल पर बस एक बात पूरी न्यूज अभी कुछ ही देर में । मनोहर लाल ने सोचा अब तो 15 मिनट का इंतजार करने के सिवा कोई चारा नहीं। न्यूज ने उनके मन में इतनी जिज्ञासा पैदा कर दी कि एक-एक मिनट काटना उनके लिए बहुत भारी सा लगने लगा । हर मिनट पर बस घड़ी पर नजर जाती रही । ख़ैर जैसे-तैसे करके 15 मिनट बीत गए।

देखा तो अब न्यूज सामने थी। देखते ही मनोहर लाल की आंखो में आंसू आ गए । न्यूज में दिखाया जा रहा था कि ‘ कल रात महारष्ट्र के पालघर गांव में 200-300 की भीड़ ने गलत फहमी के चक्कर में 2 बूढ़े साधुओं और उनके ड्राइवर की पीट – पीट कर हत्या कर दी ‘। पूरी खबर देखी तो पता चला कि गांव वालों ने उन्हें चोर समझ लिया । गांव की पुलिस भी वहां मौजूद थीं परन्तु उनके सामने ही लोगों ने 3 लोगों ने मार डाला ।

खबर सुनकर मनोहर लाल का मन इतना विचलित हो गया कि टीवी तुरंत ही बंद कर दिया और चारों तरफ जैसे शांति हो गई। फिर वे सोचने लगे कि आखिर इस समय जब लॉकडाउन है उस समय इतनी भीड़ का जमावड़ा उन्हें कुछ आश्चर्य में डाल देता ऐसा कैसा संभव है दूसरी गौर करने वाली बात ये थी कि पुलिस के होते हुए ऐसी घटना संभव सी नहीं लगती तीसरी बात पर उन्होंने गौर किया कि न्यूज में को वीडियो दिखाई गई थी उसमें पुलिस का एक आदमी उनमें से एक साधु को पकड़ कर लेकर जा रहा था और वहीं लोगों की भीड़ उन्हें पकड़ लेती है। मनोहर लाल पेशे से एक जासूस रह चुके थे तो उनका ऐसा सोचना लाजमी था और ये तस्वीर किसी आम आदमी को भी यही सोचने को मजबूर के सकती है।

परन्तु इस घटना से मनोहर लाल को बहुत धक्का पहुंचा कि वे साधु भीड़ के सामने हाथ जोड़ रहे थे परन्तु लोगों ने उन पर कोई दया नहीं दिखाई। भीड़ की ऐसी गलती पर उन्हें बहुत गुस्सा आया । वे सोचने लगे कि अब भीड़ इसे भूल का नाम दे रही है पर उन 3 व्यक्तियों की तो मौत हो गई। उनका मन किया की इसी समय उस भीड़ से पूछा जाए कि क्या अब गलती मानने से उन लोगों की जान वापस आ जाएगी। मनोहर लाल ने उन 3 व्यक्तियों के लिए 2 मिनट का मौन रखा फिर शोक मग्न हो गए।

पाठकों मुझे लगता है आपको ये कहानी पढ़ कर बहुत दुख हुए होगा और ऐसी भीड़ और पुलिस पर गुस्सा आया होगा । मैं आप लोगो से गुजारिश करूंगा की आप इस कहानी को लाइक देने से पहले एक बार उन मृतकों कि आत्मा की शांति के लिए दो मिनट का मौन रखें । मेरी बस इतनी ही चाह कि इस घटना के आरोपियों को कड़ी से कड़ी सजा दे जाए ताकि अगली बार कोई ऐसा करने कि सोच भी ना सके।

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