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इंसान गलतियों से सीखता है

नमस्कार, पाठकों आज मैं एक नई कहानी के साथ प्रस्तुत हूं जिसके सभी पात्र काल्पनिक हैं। इस कहानी का शीर्षक है ‘ इंसान गलतियों से सीखता है ‘ ।

राम गोपाल दास अभी उठे ही थे कि उनकी पत्नी सुमित्रा ने उनसे तेज स्वर में कहा तुम बस सोते ही रहो तुम्हे पता है कि कितने दिनों से खेत में फसल उगी हुई पड़ी है। उसे काटने की तुम्हे कोई चिंता ही नहीं की खेत में फसल कटनी है पर तुम तो बस सो लो। और जाके चौराहे पर बैठक जमा लो काम से तो कोई मतलब ही नहीं ये भी नहीं सोचते की घर कैसे चलेगा

असल में राम गोपाल दास पेशे से एक किसान थे परन्तु एक अच्छे वक्ता भी थे और गांव के सब लोग उन्हें चौराहे पर बैठकर किसी ना किसी विषय पर बात करने के लिए ले जाते थे ।

सुमित्रा की बात सुनकर वे बोले अरे तुम इतनी चिंता क्यों करती हो फसल तो अपनी है कौनसी कहीं भागी जा रही है। सुमित्रा बोलीं अरे तुम तो पागल हो गए अगर कोई जानवर का झुंड खेत में घुसकर सारी फसल खा गया तो हम क्या करेंगे या फिर अगर बरसात हो गई या आंधी आ गई तो पूरे साल भर की मेहनत बेकार चली जाएगी फिर हम अगली फसल तक अपना गुजारा कैसे करेंगे।

राम गोपाल बोले अरे कुछ नहीं होगा… अच्छा में पहले जरा नहा – धो लूं और कुछ खा लूं उसके बाद खेत की ओर निकल जाऊंगा और रास्ते में से मजदूरों को ले जाऊंगा । सुमित्रा कहने लगीं ठीक है पानी गरम करती हूं और खाना बनाने रख देती हूं पर जल्दी नहा के निकल जाना।

राम गोपाल जी खाना खा के घर से खेत की ओर चल देते है रास्ते में उन्हें मनोहर मिल जाता है । राम गोपाल जी अपने पड़ोसी मनोहर से कहते अरे ओ मेरा उधार कब चुकाएगा तेरे तीन महीने नहीं हुए। मनोहर कहता है माफ करना वो जरा अभी फसल नहीं बिकी जब फसल बिक जाएगी तभी आपके पैसे चुका दूंगा । राम गोपाल कहते हैं चल ठीक है और आगे की और चल देते हैं।

रास्ते में चौराहा पड़ता है और गांव के कुछ लोग उन्हें जबरजस्ती बैठा लेते हैं और किसी विषय पर बात चलने लगती है और बात करते – करते उन्हें पता ही नहीं चलता कब शाम हो जाती है । सुमित्रा घर पर सोचने लगीं कि अब तक राम गोपाल जी आए क्यों नहीं वे अपनी 10 साल के बेटे जय को भेजती हैं कि जरा देख के आ तेरे पिता जी कहां रह गए। जय जाता है और देखता की उसे पिता जी तो चौराहे पर बैठे बात बना रहे हैं। वे उनके पास जाकर बताता है कि सुमित्रा ने उसे उन्हें लाने को भेजा है। राम गोपाल जी को याद आता है कि अरे उन्हें तो मजदूरों को लेकर फसल काटने जाना था… अब क्या होगा अब तो सुमित्रा बहुत नाराज़ होगी।

वे घबराए हुए घर में घुसते हैं। आते ही सुमित्रा पूछती हैं काट आए फसल अब बेचने कल जाओगे। राम गोपाल सकुचाते हुए कहते हैं फसल नहीं कटी । सुमित्रा आश्चरयजनक स्वभाव से पूछती हैं मतलब! राम गोपाल उन्हें पूरी बात बता देते हैं।

अगले दिन फिर सुमित्रा राम गोपाल को जगाती हैं और जल्दी से फसल कटने के लिए जाने को कहती हैं। इस बार वे फिर खेत कि और चल देते हैं परन्तु इस बार फिर चौराहे पर लोग उनसे रुकने को कहते हैं परन्तु वे मना कर देते हैं तब एक आदमी उनसे कहता है कि अच्छा बस पांच मिनट के लिए रुक जाइए पांच मिनट में क्या जाता है। राम गोपाल जी सोचते हैं हां ये बात भी सही पांच मिनट में क्या जाता है। परन्तु वे बात करने में इतने रम जाते हैं कि उन्हें समय का पता ही नहीं चलता और फिर से दिन ढल जाता है। फिर उन्हें बुलाने के लिए जय को जाना पड़ता है।

सुमित्रा बहुत दुखी होती हैं और सोचती हैं अब क्या किया जाए। वे जय से मनोहर को सारी बात बताने के लिए कहती हैं । मनोहर जय को राम गोपाल को सबक सिखाने का एक सुझाव देता है । वह कहता है हम आज रात ही फसल काट देते हैं और फिर कल सुबह सब गांव वालों के साथ मिलकर राम गोपाल जी को ये बताएंगे कि सारी फसल नीलगाय के एक झुंड ने खा ली। जय घर आकर ये सुझाव अपनी मां को सुना देता है। वे जय को फिर मनोहर के पास उसकी इस कार्य में मदद करने की कहती है कि वह मजदूरों कि मदद से रात को फ़सल कटवा दे और जानवरों वाली अफवाह भी फेला दे।

अगले दिन सुमित्रा मनोहर के सुझाव अनुसार ही करती हैं वह राम गोपाल को चिल्ला के उठाती हैं । वे उनसे कहती है कि जल्दी उठो हमारा सब कुछ बर्बाद हो गया अब हम क्या करेंगे। राम गोपाल जी हरबड़ाकर पूछते हैं क्या हुआ। सुमित्रा कहती है… कुछ नहीं बचा … नीलगायों ने सब तबाह कर दिया । राम गोपाल डर जाता है और तुरंत खेत की और भाग पड़ता है । उसकी आंखों के सामने खेत कि फसल गायब होती है वह रो पड़ता है और अास पास के लोगों से पूछता हैं यहां क्या हुआ था तो लोग कहने लगते है हम ने सुना कि नीलगायों ने सारी फसल खा ली। पीछे से सुमित्रा आती है और कहती है देख लिया तुम्हारी लापरवाही का नतीजा । राम गोपाल कहता है तुम सही कहती थीं मुझे तुम्हारी बात माननी चाहिए थी मुझे माफ़ कर दो।

सुमित्रा कहती हैं अच्छा अब रोना बंद करो फसल सुरक्षित है । और इसी के साथ सुमित्रा पूरी बात राम गोपाल को बता देती है । राम गोपाल कहते हैं अब मैं समझ गया हूं आगे से कभी ऐसी गलती नहीं करूंगा।

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